भारतीय पकवान शास्त्र का जिक्र आते ही बरबस ही सुगंधित और समृद्ध पकवानों की याद आ जाती है, जिन्हें कई तरह के मसालों में मिलाकर पकाया जाता है। यह मसाले भोजन को रंगने और स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ उसे संरक्षित भी करते हैं। इनसे भोजन सुगंधित होता है। इन्हीं में से कुछ प्रमुख मसाले निम्न हैं-
1. इलायच
यह दो प्रकार की होती है छोटी और बड़ी। छोटी इलायची भोजन को सुगंधित करने का काम करती है और बड़ी इलायची मसाले का। संस्कृत में इसका नाम एला है। इसके औषधीय गुण हमें बीमारियों से बचाते हैं।
View 12 photos2. लौंग
लौंग को अंग्रेजी में ’क्लाॅव’ कहते हैं। ये ’यूजीनिया कैरियाफाइलेटा’ नाम के पौधे की सूखी कलियाँ होती हैं। संस्कृत भाषा में इसे ’पिप्पली’ के नाम से जाना जाता है। भारतीय भोजन में इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। इससे भोजन सुगंधित होता है। इसका दवा के रूप में भी प्रयोग होता है। दाँत के दर्द में इसके तेल का प्रयोग होता है तथा खाँसी में समूची लौंग चूसना लाभदायक है।
3. दालचीनी
दालचीनी एक सदाबहार पेड़ की छाल है। यह श्रीलंका तथा दक्षिण भारत में होती है। दालचीनी एक सुगंधित मसाला है। इसकी गणना गरम मसालों में होती है। इसकी पत्ती से बना तेल मच्छरों को मारने के काम आता है।
View 12 photos4. कालीमिर्च
पिप्पली वंश की एक लता के समान पौधे पर पके, अधपके और सूखे फलों के रूप में काली मिर्च के बीज होते हैं। सूखे फलों से जो बीज निकलते हैं, वह काली मिर्च होती है। इसका प्रयोग मसाले के रूप में होता है। इसका स्वाद तीखा होता है। यह स्फूर्तिदायक और उत्तेजक मसाला है। आयुर्वेद में इसका औषधि के रूप में भी प्रयोग होता है। खाँसी, वात, श्वास आदि रोगों की चिकित्सा के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
View 12 photos5. जीरा
संस्कृत में ‘जीरक’ के नाम से जाना जाने वाला जीरा देखने में सौंफ की तरह होता है। यह पास्र्ले जाति के पुष्प का पौधा है। पुष्प के बीजों को सुखाकर जीरा बनता है। भारतीय व्यंजनों में इसका प्रयोग साबुत और पिसे दोनों रूप में होता है। इसके पुष्प सफेद या गुलाबी रंग के होते हैं।
View 12 photos6. धनिया
मारवाड़ी में धोणा कही जाने वाली धनिया भारतीय रसोई की शान है। इसकी पत्तियों और तने से लेकर बीज तक उपयोगी है। हरी धनिया व्यंजनों को सुगंधित करने और सजाने के काम आती है तो सूखी धनिया (बीज) मसाले के। अनेक रोगों में यह औषधि का कार्य करती है।
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7. जायफलतथाजावित्री
जायफल तथा जावित्री ’मिरिस्टिका’ नामक वृक्ष से प्राप्त होते हैं। यह केरल, श्रीलंका आदि स्थानों में उगता है। इसका फल जब पकने पर फट जाता है तब उसके दो हिस्से होते हैं। सिंदूरी रेशे जैसा भाग जावित्री और बीज जायफल होता है। दोनों का स्वाद लगभग समान होता है। इनका अधिकतर प्रयोग खाने को सुगंधित करने के लिए होता है।
View 12 photos8. मेथी
इसका पौधा लगभग 8 से 10 इंच का होता है। इसकी पत्तियों का प्रयोग साग के रूप में होता है और पीले बीजों का प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है। इसकी पत्तियाँ और बीज दोनों गुणकारी होते हैं तथा अनेक रोगों में औषधि के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
View 12 photos9. हल्दी
अदरक के वर्ग की ही एक वनस्पति हल्दी है जो की पौधे की जड़ होती है। यह पीले रंग की होती है और भोजन को पीला रंग देती है। आयुर्वेद में इसका प्रयोग औषधि के रूप में होता है। विवाह और शुभ अवसरों पर इसका प्रयोग शुभ फलदायी माना जाता है। यह सौन्दर्यवर्धक होती है।
View 12 photos10. सौंफ
भारतीय व्यंजनों में सौंफ का अपना अलग स्थान है। इसका पौधा गाजर की प्रजाति है। जो पूरे वर्ष होता है। यह व्यंजनों को सुगंधित करने के साथ ही अनेक रोगों की औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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11. केसर
केसर एक रक्तिम वर्ण का मोटे धागे की तरह का मसाला है जिसकी फसल कश्मीर में होती है। यह व्यंजन को सुगंधित करने और जर्द (नारंगी) रंग देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह विश्व के सबसे कीमती मसाले के रूप में जाना जाता है।
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